इस दीपावली जरा सोचिए

सीधीबात के आप सभी सुधी पाठकों तथा ब्लॉगर समुदाय के तमाम लेखकों, पत्रकारों, पत्रकारिता के विद्यार्थियों व बुद्धिजीवियों को दीपावली की हार्दिक शुभकामनाएं।

आज से मैं कुछ दिनों की छुट्टी पर जा रहा हूं, अपने घर, बरही(हजारीबाग), झारखंड। जाने से पहले मैं कुछ सवाल करना चाहता हूं, जिनपर आप और हम दीपावली के अवकाश में तमाम निजी सुख-स्वार्थ को परे रखकर इत्मिनान से विचार करें:-
  • यह कि, इस बार की दीपावली हम क्यों मनाने जा रहे हैं?
    कहते हैं दीपावली अंधकार पर प्रकाश की जीत का पर्व है...क्या हमने अंधकार मिटाने या उसे कम करने में कोई भूमिका अदा की है?
  • फिर आप या हरेक भारतवासी किसे अंधकार मानते हंै?....पर पहले हमें खुद से यह सवाल करना, हालांकि शर्मनाक, पर लाजिमी है कि हम अपने देश से कितना प्यार करते हैं?
  • यह भी कि अपनी मां और भारतमां में कितना फर्क महसूस करते है? क्या खुद को हम भारतमां के सच्चे सपूत मान पाते हैं?
  • देश की अखंडता और सांप्रदायिक सद्भावना से हम व्यक्तिगत तौर पर कितने सहमत हैं?
  • हमारी युवा सोच में ऐशो-आराम की नौकरी व जीवन से भी अधिक महत्वपूर्ण कोई लक्ष्य है?
  • देश के नेताओं को सत्ता की कुर्सी से अधिक प्यारा क्या है? जिन्हें हम वोट देते हंै या वोट न देकर मौन समर्थन करते हैं।
  • धर्म, भाषा, क्षेत्र के नाम पर आतंक, दंगा, नफरत व विवाद में आप किसी स्तर पर शामिल नहीं, तो इनका विरोध कैसे करते हैं?
  • अंत में, हम कैसे देशद्रोही नहीं है? और कैसे इस देश के जिम्मेदार नागरिक हैं?
    जरा सोचिए!
आपका,
उदय केसरी

8 comments:

  1. आपने चिंतन के लिए बहुत ही अच्छा विषय दिया है.
    धन्यवाद.

    आपका
    महेश
    http://popularindia.blogspot.com
    http://aatm-chintan.blogspot.com
    http://dharm-darshan.blogspot.com

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  2. आपको एवं आपके परिवार को दीपावली की हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाऐं.

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  3. yh baat kya ap par bhi lagu hoti hai janab

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  4. बहुत अच्‍छे प्रश्‍न किया है आपने। हम सभी पाठकों को इसका जवाब देना ही होगा।

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  5. sir,
    at first i wish you a very happy diwali .
    sir your questions are really practicly but who will try to found the answers .why dont we try to solve them right now witout wasting any moment .

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  6. I m not a journalist or a so called budhhijivi........ but as a citizen of india and a normal ordinary man i would like to say specially what our young generation thinks ........
    no one here is bothered about serving his nation .......every youngster wants to enjoy his life to the upmost level and why sould he dont think so???????
    just because he is a indian.......
    no......
    hame apni soch badalni chahiye
    sirf kahne se kuchnahi hota
    get back to some work yaar.....

    I think ki evry one either a bzzns man or a working official sould do his work with whole heart and honestly.........if he/she is not doing so he sould be compelled to do so by the rules and regulations imposed in the constituion........

    hame sirf ye nahi sochna ki bahrat mahan hai ............
    kaha great hai yaar ......

    maine aaj tak with my heart feel nahi kiya ki india is great and i m not proud to b an indian.......

    newspaper me ek din padha ki china me ek corrupt official ko market place pe hanged to death.........

    aur hamare yahan.......

    our c.m (jharkhand)...is the foremost example

    kuch sikho yaar china se.......
    if evry prson is compelled to perform his/her duty honestly then only evry branch and every system will work good and tab hi hamara desh tarakki kar sakta hai........



    .......from

    manish gautam
    manish.gautam.india@gmail.com

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  7. आप सही कह रहे है हमारे लिए सबसे बड़ी दुःख की बात है जिनके कंधो पर देश का भार है ओ अपने रस्ते से भटक गए हैl ms.ash_kumar@yahoo.com

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