चुटकी का खेल बना पूर्वजन्‍म की यात्रा!

उदय केसरी  
पिछले एक हफ्ते से एनडीटीवी इमेजिन पर प्रसारित रियलिटी शो ‘राज पिछले जन्‍म का’ पर पता नहीं क्‍यों मुझे विश्‍वास नहीं होता। कोई कैसे आधे घंटे के शो में किसी को उसकी एक नहीं दो-दो पूर्वजन्‍मों की याद दिला सकता है और वह भी फिल्‍म के दृश्‍य व कहानियों की तरह स्‍पष्‍ट। क्‍या आपको विश्‍वास होता है? ...मैंने इस शो के तीन-चार एपिसोड देखे हैं, जिसने मेरे जहन में अनेक सवाल खड़े कर दिये। इस शो में पूर्वजन्‍म की यात्रा कराने वाली डा. तृप्‍ती जैन के पास आखिर ऐसी कौन सी विद्या है, जो किसी आदमी को इतने कम समय में सैकड़ों साल पीछे ले जाती है? और फिर यदि यह मान भी लें कि आदमी को पिछले जन्‍मों में ले जाया सकता है, तो क्‍या पिछले जन्‍म की चेतना में प्रवेश कर चुका आदमी अपने इस जन्‍म की भाषा-बोली में सैकड़ों साल पुरानी बातें बता सकता है? सबसे आश्‍चर्यजनक यह कि डा. जैन सामने लेटे व्‍यक्ति से कभी-कभी ऐसे सवाल करती हैं, मानो पूर्वजन्‍म में सामने लेटा आदमी नहीं, खुद डा. जैन विचरण कर रही हों, जैसे भोपाल की एक महिला के मामले में डा. जैन जोर देकर पूछती हैं- देखो मृत पड़े सेलर के हाथ में एक घड़ी है, देखो उसमें क्‍या समय हुआ है? पिछले दिन मोनिका बेदी के मामले में भी ऐसा ही आश्‍चर्य हुआ- वह अचेतावस्‍था में अपने पिछले जन्‍म में विचरण कर रही थीं, पर जब उससे उसके पति का नाम पूछा गया, उसकी शक्‍ल-सूरत बताने को कहा गया, तो मोनिका ने बताने से मना कर दिया और कहा ‘बताना नहीं चाहती’, मानों वह अचेतावस्‍था में भी यह समझ रही हो कि इस सवाल का जवाब देने से उसकी वर्तमान जिंदगी में कोई प्रभाव पड़ सकता है। इन सब के अलावा एक बड़ा सवाल कि क्‍या मानव का पुनर्जन्‍म मानव रूप में ही होता है?

मेरे सवालों का सार यह है कि यदि पूर्वजन्‍म की यात्रा करना इतना आसान है, तो इसकी प्रामाणिकता का आधार क्‍या है? इससे तो विभिन्‍न धर्म ग्रंथों में उल्‍लेखित पूर्वजन्‍म व पुनर्जन्‍म संबंधी मान्‍यताओं पर भी सवाल खड़ा हो जाता है। मसलन, हिन्‍दू धर्मग्रंथों की मान्‍यताओं के मुताबिक चौरासी लाख यौनियों में जीवन पूरा करने के बाद ही किसी जीव को ईश्‍वर की कृपा से मानव शरीर प्राप्‍त होता है। इसीतरह, पूर्वजन्‍म पर विश्‍वास रखने वाले बौद्ध, जैन, सिख, तावो आदि धर्मों की भी अपनी-अपनी मान्‍यताएं हैं, जिसमें ज्‍यादातर हिन्‍दू धर्म की तरह ही कर्मफल पर आधारित हैं कि- अच्‍छे कर्म से अगला जन्‍म मानव रूप में संभव है, तो फिर राज पिछले जन्‍म के एक शो में कलाकार लिलिपुट के मामले को देखें, तो उसके बारे में कहा गया कि उसने पिछले जन्‍म में दो-दो लड़कियों के साथ प्‍यार का फरेब करके उनका दैहिक शोषण किया, तो ऐसे जीव का पुनर्जन्‍म मानव रूप में ही कैसे हुआ?

देखिये, पूर्वजन्‍म की अवधारणाओं के बारे यह मेरी सामान्‍य जानकारी है, जिसकी चर्चा करके मैं यह बताना चाहता हूं कि मेरी समझ से एनडीटीवी के प्रोग्राम ‘राज पिछले जन्‍म का’ पर मुझे विश्‍वास नहीं होता है। और यदि वाकई में यह दर्शकों को धोखा देने वाला कार्यक्रम है, तो क्‍या इसे इस तरह से प्रसारित किया जाना चाहिए? क्‍या इससे अंधविश्‍वास को बढ़ावा नहीं मिलता? इस शो के होस्‍ट अभिनेता रविकिशन एक एपिसोड में यह कह रहे थे कि ‘सांप को मारने का श्राप पीढ़ी दर पीढ़ी भुगतना पड़ता है।'...इसे क्‍या कहेंगे?

अब एक और बात आपसे कहना चाहता हूं कि मैंने इस विषय पर यह पोस्‍ट लिखने से पहले इंटरनेट पर डा. तृप्‍ती जैन के बारे में पढ़ा- उन्‍होंने हैदराबाद के एक प्रसिद्ध पास्‍टलाइफ रिग्रेशन थेरेपिस्‍ट डा. न्‍यूटन कोंडावेती के अधीन रहकर यह विद्या या कहें सम्‍मोहन विद्या सीखी है। इस विद्या के माध्‍यम से प्राय: मा‍नसिक रोगियों का इलाज किया जाता है। डा. न्‍यूटन ने खुद किसी विदेशी थेरेपिस्‍ट से यह विद्या प्राप्‍त की है और अब हैदराबाद में अपनी लाइफ रिसर्च अकादमी चला रहे हैं। इस अकादमी का दावा है कि यहां मात्र चार दिनों में पूर्वजन्‍म की यात्रा कराने की विद्या सिखी जा सकती है। इनकी वेबसाइट का पता http://www.liferesearchacademy.com/ है। यानी पूर्वजन्‍म की यात्रा करना काफी आसान है! जब मैंने इंटरनेट पर थोड़ी और खोजबीन की, तो पाया कि इंटरनेट पर दर्जनों ऐसी वेबसाइट हैं, जो आपको पूर्वजन्‍म में ले जाने का दावा करती हैं, बस आप डॉलर में उन्‍हें पहले ‘पे’ कर दें। कुछ एक वेबसाइट तो ऐसी हैं, जिस पर बस जन्‍म की तारीख, महीना व साल पूछा जाता है और दूसरे ही पल में आपके पूर्वजन्‍म का विवरण आपके सामने होता है।...तो किसी वेबसाइट पर सीडी बेची जा रही है कि- आप घर बैठे सीडी सुनकर पूर्वजन्‍म की यात्रा करें। वाह! कितना आसान है यह सब! लेकिन जब मैंने इन वेबसाइटों के अंदर जाकर टर्म एंड कंडिशंस के पन्‍नों को पढ़ा, तो वहां लिखा पाया कि इसके घोषित परिणाम पूरी तरह सत्‍य हो यह जरूरी नहीं है। यह अलग-अलग व्‍यक्तियों पर अलग प्रभाव डाल सकता है। किसी भी बुरे प्रभाव के लिए आप खुद जिम्‍मेदार हैं। यही नहीं एक-दो वेबसाइटों पर तो इसे एक कंप्‍यूटर प्रोग्रामिंग का परिणाम बताया गया और यह भी कि यह परिणाम केवल आपके मनोरंजन के लिए है। ऐसे वेबसाइटों के लिंक मैं यहां चिपका रहा हूं, आप भी इनकी सच्‍चाई का पता लगा सकते हैं-

27 comments:

  1. डा. तृप्‍ती जैन जिस तरह धड़ाधड़ पूर्व जन्‍म की यात्रा करा रही है उससे लगता है जल्‍दी ही ब्रह्मा, विष्‍णु और महेश का पद खतरे में पड़ जाएगा। यमराज बेचारे इस जैन के घर के बाहर खड़े चौकीदारी करते दिख जाएंगे। मूर्ख बनाने के अच्‍छे फार्मूले पर काम हो रहा है। भगवान भागो, यह जैन आपकी पृथ्‍वीवासियों की नजर में जो इज्‍जत है वह मिट्टी में मिला देगी। नई भगवान तृप्‍ती देवी। हे तृप्‍ती मां मेरा उद्धार करो। तृप्‍ती चालीसा, तृप्‍ती सहस्‍त्रनाम, ऊं नम: शिवाय की जगह ऊं नम: तृप्‍ती। हर हर गंगे की जगह हर हर तृप्‍ती। अरे यह तो भगवान हो गई। जय जगदीश हरे की जगह जय तृप्‍ती हरे..........। लिख डालो नया वेद त्प्‍तवेद।

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  2. आप अच्छी जानकारी जुटाई है।धन्यवाद।

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  3. खाने कमाने के धंधे हैं। बाबा लोग हैं, धर्म के सहारे कमा खा रहे हैं। इससे ज्यादा और क्या सुनना चाहते हैं आप?
    ------------------
    छोटी सी गल्ती, जो बड़े-बड़े ब्लॉगर करते हैं।
    धरती का हर बाशिंदा महफ़ूज़ रहे, खुशहाल रहे।

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  4. Aur mulla log jehad ke sahare........ :)

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  5. आज ये सब ही बिक रहा है, तो कोई क्यों न बेचे। दुनिया पैसे के पीछे पागल जो हो रही है। सब बड़ी मूर्खता है कि धार्मिक ग्रंथों में कहा जाता है कि मानव जन्म व्यक्ति 84 लाख जून भोगने के बाद मिलता है तो पिछले जन्म में मोनिका मानव कैसे हो सकती है। हर इंसान मानव कैसे हो सकता है कुछ और क्यों नहीं
    युवा सोच युवा खयालात
    खुली खिड़की
    फिल्मी हलचल

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  6. मूर्ख बना रहे हैं और देशवासी बन रहे हैं। सूचना प्रसारण मंत्रालय भी दोषी हे, पता नहीं हिंदुस्‍तान की जनता को क्‍या हो गया है और यह सब सच माना जा रहा है। प्रणव राय को भी पिछले जन्‍म की यात्रा करानी चाहिए

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  7. आपने बिल्‍कुल सही यह सब विचारणीय तथ्‍य हैं जिन्‍हें पढ़े-लिखे लोग भी अनदेखा कर देते हैं, और स्‍वयं के साथ-साथ औरों को भी दिगभ्रमित करते हैं ।

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  8. उदय जी, मैंने अभी अभी पता लगाया मेरे बारे में । पिछले जन्‍मों में मैं चंद्रगुप्‍त मौर्य और सम्राट अशोक था। तो यह पूरा देश और जहां तक मौर्य शासन के तहत मेरा साम्राज्‍य था, उसके मेरे पटटे दिलवाने में आप मेरी मदद करें। उड़ीसा तो पूरा मेरा है ही, उसके लिए आप नवीन पटनायक जी से बात करें कि वे कुर्सी खाली करें ताकि मैं वहां फिर से अपना शासन स्‍थापित कर सकूं।

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  9. यद्यपि इस कार्यक्रम को मै देख नहीं पाया हूँ किन्तु जैसा आपने बताया है, उसे पढकर ही कहा जा सकता है कि ये सब फालतू में लोगों को मूर्ख बनाने का प्रपंच भर है...जब विज्ञान अभी तक खुले रूप में "आत्मा" जैसे किसी तत्व को ही स्वीकार नहीं पाया है तो वैज्ञानिक विधियों(भौतिक संसाधनों) के जरिए "पुनर्जन्म" की यात्रा तो हास्यास्पद ही कही जा सकती है.......
    अब रही बात 84 लाख योनियों की तो उसके लिए मैं आपको बताना चाहूँगा कि हमारे शास्त्रों में अधिकतर बाते कथा कहानियो इत्यादि के माध्यम से प्रतीकात्मक रूप में कही गई हैं....लेकिन उनका भावार्थ समझने की अपेक्षा साधारण समाज द्वारा उन्हे जस का तस स्वीकार कर लिया गया....जैसे कि 84 लाख योनियाँ कही गई है। जब कि ऎसा कुछ भी नहीं है....कर्मयोनी में उत्पन होकर उसका पुनर्जन्म भी कर्मयोनी(मनुष्य रूप में) में ही होगा...ये नहीं कि उसका आगामी जन्म किसी पशु-पक्षी,कीट इत्यादि के रूप में हो । पुनर्जन्म होगा तो मनुष्य योनि में ही होगा...हाँ लिंग भिन्न हो सकता है यथा पुरूष से स्त्री अथवा नपुंसक......
    रही बात कुत्ता,बिल्ली,पशु-पक्षी इत्यादि विभिन्न 84 लाख योनियों की तो ये समस्त योनियाँ हमारे इसी मानवी शरीर में विद्यमान है....आप इन्हे अपने आसपास विभिन्न मनुष्यों के जीवन को देखकर भलीभान्ती अनुभव भी कर सकते हैं..... यहाँ योनियों से अभिप्राय मनुष्य की प्रवृ्तियों से है । हम में से प्रत्येक मनुष्य की सोचने,आचार-व्यवहार,कर्म की प्रवृ्ति किसी न किसी जीव(पशु-पक्षी/कीट इत्यादि)से मिलती है...पूर्ण मनुष्य बनने तक हमारा इसी प्रकार इसी मनुष्य शरीर में पुनर्जन्म होता रहता है ।
    पुनर्जन्म से संबंधित मेरे कुछ लेख शायद आपकी जिज्ञासा का शमन कर सकें:---
    1.पुनर्जन्म रहस्य---- वेदांत एवं विज्ञान की दृ्ष्टि से
    2.पुनर्जन्म की वैज्ञानिक संभावना
    3.विज्ञान भी मानने लगेगा कि सचमुच भूत-प्रेतादि आत्माओं का अस्तित्व हैं

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  10. पोस्ट न सिर्फ़ रोचक है बल्कि इसमें मौजूद तथ्यों की वजह से ये प्रमाणिक भी लगा। ये सच है कि यूँ पिछले जन्म की यात्रा करवाना कोई खेल नहीं। एक बात जो मैं आपको बताना चाहूंगी वो ये कि सम्मोहन महज आधे घंटे में नहीं होता है। इसमें नीचे लिखा आता है कि कितने घंटों बाद इंसान सम्मोहित हुआ है। जैसे कि 60 मिनिट या 3 घंटे बाद।

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  11. मैं भी जानना चाहता हुँ राज पिछले जन्म का प्रीति जैन को मेल कर चुका हुँ, देखता हुँ बुलाती है की नही? या फ़िर ये लोग स्टार्स लोगों को बुला कर ढोंग धतुरा ही फ़ैला रहे हैं। टी आर पी बटोर रहे हैँ।

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  12. सब मनोरंजन के युग में अपनी अपनी फसल लगा रहे हैं..

    बहुत अच्छा विश्लेषण किया है आपने.

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  13. मुझे भी इस कार्यक्रम में विश्‍वास नहीं है। मैं तो एक अंक भी नहीं देख पाया। सब कुछ बकवास लगता है। विश्‍वास करने का तो प्रश्‍न ही नहीं उठता।

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  14. आपके लेख से पूरी तरह सहमत, कमल शर्मा जी से सहमत। मैंने भी पता किया है, मैं पिछले जन्म में हिटलर था… :)

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  15. क्या करेंगे. कुछ तो देना ही है जो चल निकले वही दे दो. यहां सत्यता कौन जानना चाहता है जो बनाने वाले इस पर विचार करें. आप स्वयं यह सोचें कितने लोगों ने अब तक आपके इस नजरिये से सोचा होगा. हां अब जरूर सोचेगे लेकिन उनकी भी संख्या कितनी होगी. फिर चलने दीजीये....

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  16. सर ,आपके लेख से "राज पिछले जन्म का" इस टी.वी शो के बारे में मन में चल रही जिज्ञासा अब शांत हो गई है .. जनता को बेबकूफ बनाने के खेल में नया कुछ तो आना ही था ..पर पूर्वजन्म जैसे धार्मिक मान्यता पर इस तरह चोट होगी नही सोचा था ...न जाने कितने भले काम करने के बाद इस बार इंसान हुए है इंसान बनना इतना आसन नही ....जितना डॉ. जैन अपने शो पर बता रही है..

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  17. aap ka lekh bilkul galat hai kayoun ki pichala janam ek science hai jo ki sadharana manav ke bas ke bahar he ye keval sanayasi our dhanayai yo ke liye hai ki pichele janam mai ki galtiya hai uska repititation bar bar na ho isiliye purva janam dekha jata hai our rahi bat 84 lakh youni ki to admi mai woh power hai ki woh chaiye to 84 youni mai ja sakta hai ya sidhe manav ma aa sakta hai manav ek chourehe per khada hai uski icha se woh kahi bhi ja sak ta hai yadi woh kisi janvar se prem karta hai to uska agla janam janvar mai hoga eke rishi the unko hiran se bhout prem tha to agle janam me woh hiran ke rup me janam liya tha

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  18. ek episode me dikhaya gaya ki 1960 me usane jo newspaper dekha uspar Dainik Bhaskar lika tha. kya 1960's me dainik bhaskar tha? kya 1960 me jeans pant ya sports shoes the?

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  19. are bhai tum kyo dukhi hote ho tum bhi chale jao purv janam ki yatra karne ek to woh bechari itna entertainment kar rahi he or tum dukhi ho rahe ho.

    or ab dekhte jao kitne hi kalakar pichale janam me kitne mahan honge.

    {note}

    kuch bhi ho bechara gareeb greeb hi rahega or ameer ameer hi rahega.

    or ab kuch dino me nayaa show chaloo hoga jisme bhagwano ko dikhaya jayega

    aap ki adalat me bhagwan hajir honge or sab swal karenge.


    ab kya kare

    tv per bheja kharab karne ke liye kuch bhi nahi bacha

    ( Funny Dummy )

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  20. 'RAJ PICHLE JANAM KA' DARSHAKO KO BEWAKUF BANA RAHE HAI OR PAISA KAMA RAHE HAI KYA ITNA ASAN HAI APNE PICHLE JANAM KE BARE MAI JAN LENA..? OR WAISE BHI IS JANAM KI PROBLEM KAM HAI KYA JO PICHLE JANAM KE BARE JAAN KAR OR PARESHAN HO....

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  21. Beautiful and fashionable young people theme of the times! Sports series is the same fashion!
    By Air Jordan shoes

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  22. Purv Janm Hota Hai, Leki uske bare me janna bahut mushkil he

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  23. Ye sach hai ki pichhala janm hota hai ;ese bahut se thathya hai jo duniya me paaye gaye hai is liye ise ignore nahi kar sakte hai ; lekin is program ki baat kare to mere bhi samajh ke bahar hai.kyo ki isme celebrities ko hi jyada bulaya gaya hai jo log acting me mahir hai..kese yakeen kare ki wo log jo react kar rahe hai wo sahi hai..

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  24. kary karm to nahi dekha lakin itna jarur kah sakta hoon ki jo hame swapn me dikhta h vo poorv janm me hamne deki hooi kai ghatnaon se samandhit ho sakti ha

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  25. ha mare apas me , mat vhed ke upar pe yesabhi kam kar rahe hai, ham sabhi apne kam kko chor ke enke bhajul ke bato par ko dehe,

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  26. please read osho book

    "mai mrithu sikhata hoon"

    sab pata chal jaeg.

    thanka.

    sk

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