नीतीश की धर्मनिरपेक्षता व ममता की नाराजगी के मायने

उदय केसरी 
देश की राजनीति में देश कहीं पीछे छूटता जा रहा है। यह कोई नई बात नहीं है, लेकिन जनता को बार-बार इसे याद कराना भी जरूरी है, क्योंकि जनता से जुड़े मुद्दे अब सियासत के गलियारों में सत्ता और अहम के मुद्दों के आगे दम तोड़ने लगे हैं। देश के नाम पर और जनता के वास्ते अनेक राजनीतिक दल मौजूद हैं, लेकिन गौर करें तो लगभग पार्टियां पाइवेट लिमिटेड कंपनी जैसी या ऐसी कंपनियों के लिए हो चुकी हैं।

अच्छे दाम पर भद्दी चाय का प्लैटफार्म

उदय केसरी
भारत में ही नहीं, चाय दुनियाभर में लोकप्रिय पेय है। अपने देश  में चाय तो जैसे ज्यादातर लोगों की शक्ति, स्फूर्ति का राज हो। इसे पीए बिना जैसे कोई काम न हो। तभी सुदूर गांव से लेकर मैट्रो शहर तक कोने-कोने में भले ही आपको और कुछ मिले न मिले पर चाय की छोटी-बड़ी दुकान मिल ही जाएगी।

अब क्यों प्रतिक्रियावादी हो रहे हैं प्रधानमंत्री ?

उदय केसरी 
देश  बहुत मुश्किल  दौर से गुजर रहा है। सरकार और उसके नीति-नियंता अनिर्णय की स्थिति में हैं। महंगाई चरमसीमा की ओर बढ़ रही है। आम जनता कराह रही है। इन बातों से देश  का हर एक आम नागरिक निराश  और दुखी है, सिवाय कांग्रेस के शीर्ष नेताओं और यूपीए सरकार के।

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