राष्ट्रधर्म के लिए जेहाद की जरूरत

आतंक के आगे बेबस भारत : जरा सोचिए!
उदय केसरी
क्या आपको मालूम है, दुनिया में आतंक के आगे इराक के बाद सबसे अधिक बेबस कौन है?....बेशक, भारत। जी हां, पिछले दो दशकों से अधिक समय से भारत चुपचाप आतंकी हमले झेल रहा है। यही नहीं, एक रिपोर्ट की मानें तो 2004 से 2007 तक उत्तर, दक्षिण व मध्य अमेरिका, यूरोप एवं यूरेसिया में आतंक की जद चढ़े कुल 3,280 बेगुनाहों से भी ज्यादा 3,674 लोग अकेले भारत में मारे गए। इस दौरान भारत में आतंकियों ने 3032 बार हमले किये। अब यदि इसमें 2008 में एक के बाद एक हुए और हो रहे आतंकी हमलों में मरने वाले बेगुनाहों की संख्या भी जोड़ दी जाए, तो यह आंकड़ा चार हजार के पार हो जाएगा।
आतंक के शिकार बेगुनाहों की लाशों की यह संख्या और भारत की बेबसी की यह झलक मैं कोई सामान्य ज्ञान बढ़ाने के लिए नहीं बता रहा हूं, जिससे देश के युवा किसी रोजगार प्रतियोगिता परीक्षा में अच्छे अंक प्राप्त कर सके। बल्कि देश के युवाओं को सूचित करना चाहता हूं, जिन्‍होंने बेरोजगारी या कहें मनचाही नौकरी के आगे देश की सुरक्षा, अस्मिता और अभिमान को ताक पर रख दिया है। यह भी बताना है कि दुनिया का सबसे बड़ा आतंकी संगठन अल-कायदा अब घोषित तौर पर भारत का दुश्‍मन है। हूजी, इंडियन मुजाहिद्दीन, लशकर-ए-तैयब्बा आदि तो हैं ही। अल-कायदा का प्रवक्ता व मीडिया सलाहकार ऐडम याहिये गैडन ने एक वीडियो टेप जारी कर जो कहा है, उसमें कश्‍मीर में इस्लाम के लिए लड़ रहे आतंकियों को मदद करने की बात भी की है। यानी भारत से अपनी दुश्‍मनी की घोषणा कर दी है।
ऐडम याहिये गैडन के बारे में थोड़ा और जान लें कि यह कौन है? यह मूलतः ईसाई व अंग्रेजी भाषी अमेरिकन है। उसने 1995 में 17 साल की उम्र में धर्मपरिवर्तन कर इस्लाम धर्म कबूला और 2003 में अल-कायदा में शामिल हो गया। फिलहाल, वह अल-कायदा का वरिष्ठ अंग्रेजी प्रवक्ता, धर्म प्रचारक व मीडिया सलाहकार के रूप में कार्यरत है। वह पिछले कई सालों से अल-कायदा के वीडियो टेपों में दिखता रहा है। 9/11 की आतंकी घटना के बाद अमेरिकी सुरक्षा एंजेंसियां पागल कुत्ते की तरह उसकी खोज में लगी हैं, पर अबतक उसका कोई सुराग नहीं लग सका है।
अब एक और आतंकी के बारे बताना चाहता हूं, जिसे जान कर आश्‍चर्य तो नहीं, पर दुख जरूर होगा। अल-कायदा के इस आतंकी का नाम है-धीरेन बरोत। यह मूलतः भारतीय है, जिसका जन्म बड़ौदा के एक हिन्दू परिवार में हुआ। इसके कई उपनाम है जैसे-अबू मूसा अल हिन्दी, बिलाल, अबू ईसा अल हिन्दी, ईसा अल ब्रितानी आदि। बरोत को ब्रिटेन में कई आतंकी गतिविधियों से जुडे़ आरोपों के तहत 3 अगस्त 2004 में गिरफ्तार किया गया और उसे 2006 में उम्रकैद की सजा सुना दी गई। बरोत ने 20 साल की उम्र में इस्लाम धर्म कबूला। उसने 1995 में पाकिस्तान जाकर कश्‍मीर में भारतीय सेना के खिलाफ आतंकी प्रशिक्षण प्राप्त किया। यही नहीं, 1999 में ईसा अल हिन्दी के नाम से ‘द आर्मी आफ मदीना इन कश्‍मीर’ नामक एक किताब भी लिखी। इसके बाद वह 2000 तक अल कायदा के एजेंट के रूप में काम करता रहा।
ऐडम याहिये गैडन और धीरेन बरोत के बारे में बताने की वजह यह है कि यह दोनों मूलतः मुस्लिम नहीं हैं। एक ईसाई, तो दूसरा हिन्दू है। मगर दोनों अल-कायदा के हार्डकोर आतंकी हैं। एक सवाल जो भारत में कई बार सांप्रदायिक सदभावना दूषित करने की कोशिश करता है, उसका जवाब यह है कि आतंकी केवल मुस्लिम ही हो यह जरूरी नहीं। वह किसी भी धर्म का हो सकता है। आतंकी तो इस्लाम को बेच कर दहशत का करोबार कर रहे हैं, असल में उनका कोई धर्म नहीं।
पर सवाल यह नहीं है। सबसे बड़ा सवाल भारत की बेबसी का है, जिसके लिए जिम्मेदार लोगों को स्वार्थ की निद्रा से कौन जगाएगा? कब हम अपने राष्ट्रधर्म के लिए जेहाद करने को तैयार होंगे? भारत को संप्रदाय के विविध धर्मों की बेड़ियों में जकड़ने की कोशिश खतनाक है, ऐसे दमघोंटू माहौल में बहुरंग भारत की आत्मा एक पल के लिए भी सांस नहीं ले सकती है।.....जरा सोचिए!

3 comments:

  1. "सवाल भारत की बेबसी का है, जिसके लिए जिम्मेदार लोगों को स्वार्थ की निद्रा से कौन जगाएगा? कब हम अपने राष्ट्रधर्म के लिए जेहाद करने को तैयार होंगे?" आप का सवाल विचारणीय है परन्तु आपको याद दिला दूँ कि राष्ट्रधर्म के लिए जेहाद की शुरुआत हो चुकी है, आप को जम्मू का आन्दोलन याद है ना जब हाथ में तिरंगा लिये हुए वृद्ध महिला ने पुलिस को ललकारा था - 'हिम्मत है तो चला गोली '

    ReplyDelete
  2. अवनीश तिवारीOctober 7, 2008 at 6:00:00 PM GMT+7

    सर आप ने सही कहा यदि अमरिका आतंकबादी को मारने के लिए पाकिस्तान की सीमा के अन्दर जा सकता है तो भारत क्यों नही- avnish

    ReplyDelete
  3. सर नमस्कार. आप का कहना बहुत सही है कि आतंक फैलाने वालों का कोई धर्म नही, बल्कि वे किसी धर्म से जुड़कर उसका ग़लत फायदा उठाते है और दहशत का कारोबार करते है.
    जब तक हमारी युआ पीढी में देश के प्रति सम्मान नही पैदा होगा तब तक आतंकी दहशतगर्दी जारी रहेगी.

    ReplyDelete

Recent Posts

There was an error in this gadget