वाकई में, यह भारत के लिए शर्म की बात है

उदय केसरी
मुंबई पर आतंकी हमले के करीब डेढ़ माह बीत चुके हैं। इस हमले के जिम्मेदार पाक आतंकियों के खिलाफ भारत के पास मुर्दे ही नहीं, जिंदा सबूत भी है। यहां तक कि अमेरिकी खुफिया एंजेंसी ने भी हमले में पाक से संचालित आतंकी संगठनों के हाथ होने की बात कह दी है। मुंबई समेत लगभग पूरे देश की जनता बार-बार अपने गुस्से का प्रदर्शन कर आतंकियों को मुंहतोड़ जवाब देने की आवाज उठाती रही है। मगर इन सब के बावजूद भारत सरकार सिर्फ बयानों से कार्रवाई की कोशिश में लगी है।...क्या यह भारतीय स्वाभिमान के लिए शर्म की बात नहीं है?

मुंबई हमले के जिम्मेदार आतंकियों के खिलाफ ठोस कार्रवाई के प्रति भारत सरकार के नरम रवैये पर ब्रिटेन के भारतवंशी उद्योगपति एवं हाउस आफ लार्डस के उपसभापति लार्ड स्वराज पाल ने भी अपनी नाराजगी व्यक्त की है। उन्होंने तो यहां तक कह दिया कि मुंबई पर आतंकी हमले की पूर्व चेतावनी के बावजूद इसे रोक पाने में भारत सरकार की नाकामी राष्ट्रीय शर्म का विषय है।

उधर, भारत के खिलाफ आतंकियों के हौसले तो देखिए, मुंबई हमले के बाद अब मेंढ़र में महीनों पहले से पक्के बंकरों में छिपे आतंकी पिछले एक हफ्ते से देश की सेना के गोला-बारूद का जवाब दे रहे है। ये आतंकी पाकिस्तान स्थित जैश-ए-मोहम्मद के सदस्य हैं। तो आखिर कब तक भारत केवल आतंकी दुष्साहस का सामना करता रहेगा? क्या हम भारत विरोधी आतंकवाद के समूल नाश के लिए आगे बढ़कर कोई बड़ी कार्रवाई नहीं कर सकते?

भारत के इस अस्वाभिमानी रवैये का ही नतीजा है कि पाकिस्तान भारत के तमाम सबूतों को नकारने की हिम्मत कर रहा है। पाकिस्तानी राजनयिक विश्‍व समुदाय के सामने भारत के खिलाफ झूठ पर झूठ बोल रहे हैं। यही नहीं अब तो पाकिस्तान के राजनेताओं, धार्मिक कट्टरवादियों व उलेमाओं ने बैठक कर भारत के खिलाफ फतवा जारी किया है, जिसमें पाक पर हमले की स्थिति में भारत के खिलाफ अपने नागरिकों को जिहाद की लड़ाई के लिए तैयार रहने को कहा गया है।

वाह! पाकिस्तान की हिम्मत की तो दाद देनी चाहिए, जो दक्षिण-एशिया की उभरती महाशक्ति भारत में जब चाहे तब आतंकी हमले करता रहे, पर उसके खिलाफ भारत केवल कार्रवाई भर की बात करें, तो बर्दाश्‍त नहीं।...एक देसी कहावत है-जेठ भेला हेठ, बैशाख भेला ऊपर। भारत के प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने बयानी कर्रवाई में सख्ती दिखाते हुए कहा कि आतंकवाद पाकिस्तानी नीति का हिस्सा है।....मगर उन्होंने यह क्यों नहीं कहा कि आतंकवाद के खिलाफ भारतीय नीति क्या है?...क्या आतंकवाद के खिलाफ भारतीय स्वाभिमान से समझौता करते रहना ही भारत की नीति है? आश्‍चर्य तो यह कि आंतरिक सुरक्षा पर आयोजित मुख्यमंत्रियों के सम्मेलन में प्रधानमंत्री ने यह तक कह दिया कि आतंकी हमलों से निपटने की हमारी तैयारी फिलहाल मुकम्मल नहीं है।...

तो क्या भारत के लिए आतंकवाद की समस्या नयी है? जिससे निपटने के लिए अबतक मुकम्मल तैयारी नहीं की जा सकी।...प्रधानमंत्री को यह कहते क्या शर्म नहीं आई।

5 comments:

  1. sabhee rajneta nitant besharm hain unse kuchh bhee nahi hoga.

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  2. क्षुब्‍ध कौन नहीं है? आक्रोशित कौन नहीं है? किन्‍तु आप जिस तरह से सरकार को गरिया रहे हैं, लगता है अब यह देश आपके रहने काबिल नहीं रह गया है। आपको सरकार पर, प्रधान मन्‍त्री पर भरोसा नहीं है, कोई बात नहीं। किन्‍तु प्रतिपक्ष के नेता आडवाणी और उनके तमाम साथी भी चुप बैठे हैं तो इसके कोई तो मायने होंगे? आपने जानने की (मैं समझने की बात नहीं कर रहा हूं क्‍यों कि यह लेख पढने के बाद आपसे वह उम्‍मीद करने की हिम्‍मत नहीं हो रही) कोशिश्‍ा की कि सत्‍ता और प्रतिपक्ष ऐसा चुप क्‍यों बना हुआ है?
    एक कहावत सुनी, पढी और प्रयुक्‍त की है - 'मूर्ख मित्र से समझदार दुश्‍मन अच्‍छा।'
    कुछ लोग सोच कर बोलते हैं, कुछ बोल कर सोचते हैं। तलाश कीजिएगा कि आप इन दोनों में से किस जगह हैं।

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  3. सहमत -आपका विश्लेषण सटीक है !

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  4. सर नमस्कार काफी दिनों बाद मै आज नेट पर काम कर रहा हु आपका भेजा हुआ मेल मिला आपका लेख तो बहुत ही सर गर्भित है मेरे देस की सिस्थिति राजनितिक कठमुल्लों के हाथ की कठपुतली बन गयी है जिसे वो जिस तरह चाहते है उसी तरह घुमाते है राजनीतिको का जमीर मर सा गया है जिससे वो केवल बयानबाजी ही कर रहे है रही बात पाक की तो वह अभी भी अपने देस के लिए मर मिटने का जज्बा है हम अपने ही देस में इन नेताओ की वजह से पुरे विश्व के सामने सर्मिन्दा हो रहे इसके लिए जब तक भगत आजाद जैसे वीर नही होगे तब तक इन कठमुल्लों की मनमानी चलती ही रहेगी

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  5. udai ji nav varsh ki mangal shubhkamnae keep it up....

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