इस मुल्‍क का कैसा खुदा है?

कहते हैं जो बेशर्म होते हैं, उनसे सुधार या सहयोग की उम्‍मीद नहीं की जा सकती है। चाहें आप कितना भी साफ-सुथरा आईना उन्‍हें दिखाते रहे। पाकिस्‍तान के शासक व हुक्‍मरान भी ऐसे ही हैं, जिन्‍हें दूसरे ही पल अपनी बातों से पलटने में जरा सी शर्म नहीं आती, तो भारत द्वारा सौंपे गए सबूतों से वे क्‍या शर्मिंदा होंगे।...मुंबई हमले में पकड़े गए आतंकी कसाब को पहले तो पाकिस्‍तान पहचानने से भी इंकार कर रहा था, वह तो बाद में अमेरिकी दबाव में उसे यह स्‍वीकार करना पड़ा कि कसाब पाकिस्‍तानी जमीन की ही उपज है।...इसे भारत के लिए एक अहम कूटनीतिक जीत कहा गया और उम्‍मीद की गई कि अब पाकिस्‍तान को भारत की बात माननी ही पड़ेगी...और वाकई में यदि पाकिस्‍तानी शासकों में त‍निक भी शर्म होती तो वे मुंबई हमले के जिम्‍मेदार आतंकियों को सौंपने में एक क्षण की देरी नहीं करते...लेकिन ऐसी सदभावना तो पाकिस्‍तान के फितरत में ही नहीं...उलटे पाकिस्‍तान के खिसियाये प्रधानमंत्री गिलानी ने एक बार फिर बेशर्मी की सारी हदें पार कर कह दिया- किसी भी हाल में वे भारत को आतंकी नहीं सौंपेंगे, चाहे अंजाम जो भी हो।...यही नहीं, पाकिस्‍तान तो भारत के खिलाफ युद्ध की तैयारी करने लगा है। युद्ध से खर्च का बोझ बढ़ने के मद्देनजर पाकिस्‍तान में अभी से सरकारी बजट में कटौती की जा रही है....अब आप ही बताएं इस मुल्क का ‘खुदा’ कैसा है? मीतेन्द्र नागेश उर्फ पत्थर नीलगढ़ी ने इसी सवाल को उठाया है, अपनी इस कविता में -

इस मुल्‍क का कैसा खुदा है?

कैसी दोगली फितरत-औ-अदा है।
इस मुल्‍क की कैसी फिजा है।।

बात-बात पर पलटते हैं रहनुमा,
इस मुल्‍क की कैसी जुबां है।।

पेट खाली, असला-औ-बारूद भरा,
इस मुल्‍क की कैसी दशा है।।

नफरत के बीज, नफरत की सीख
इस मुल्‍क का कैसा मदरसा है।

बेगुनाहों का लहू मांगता है ‘पत्‍थर’
इस मुल्‍क का कैसा खुदा है।।
-पत्‍थर नीलगढ़ी

4 comments:

  1. सर नमस्कार
    कैसा खुदा है नाम से आप ने जो आपने लेख लिखा है उससे आप यही कहना चाहते है की उस देस का कोई इमां नही है जो अपने बात पर टिका न हो- तो मै यही कहना चाहूँगा की क्या आप इस्ससे पहले कभी बात मनवाने में कामयाब हुए है जिस देस की फितरत ही लगातार बातो पर टिकने की न हो उससे आप क्या अपेक्चा कर सकते है . और रही बात पाक के प्रधानमन्त्री की तो उनका हॉल वही है की खिसियानी बिल्ली खम्भा नोचे
    इसके अलावा मितेंद्र सर की कविता इस लेख को पुरा सुपोर्ट केर रही है इनोंहे तो १० लीनो में ही साडी बात बया कर दी इसके लिए आप लोगो को भुत bhut दन्यवाद

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  2. भाई जो देश बना ही नफ़रत की, ओर धोखे की नींब पर ओर लाशो के ठेर पर उस से उम्मीद केसी, वहा के रहने वाली आम जनता से हमदर्दी है लेकिन अब भातर क्या सोच रहा है, क्यो देर कर रहा है

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  3. इस मुल्‍क का कैसा खुदा है यह आपने अच्छा लिखा है

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  4. शठे प्रति शाठ्यम समाचरेत
    'बिनु भय होय ना प्रीती'
    उदयजी क्या मैं ब्लॉग बनाने में आपकी सहायता ले सकता हूँ. अनुसरण क्या होता है और इसे कैसे किया जाता है

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