....पर देश की जय युवा पीएम से ही होगी

उदय केसरी
कांग्रेस की तो जय हो गई, लेकिन सर्वाधिक युवा आबादी वाले इस देश की जय युवा पीएम के हाथों की हो सकती है। जैसा कि मैं पहले भी कहता रहा हूं (युवा भारत की डोर क्‍यों न हो युवा हाथों में?) कि राहुल गांधी में वह तेवर परिलक्षित होता है, जिसकी जरूरत हिन्दुस्तान को है। बेशक राहुल गांधी फिलहाल की भारतीय राजनीति में एक पाक।साफ दामन वाले युवा नेता हैं, जिनकी बातों में युवा सोच समझ व सर्वोपरि राष्ट्रीयता के मूल्य प्रतिध्वनित होते हैं। बिल्कुल अपने पिता स्व राजीव गांधी की तरह।

15वीं लोकसभा चुनाव के जनादेश पर भी यदि गौर फरमाएं तो मनमोहन की विनम्रता से अधिक राहुल गांधी का भरोसा जनता को अपनी तरफ खीचने में कामयाब रहा है। इसे एक युवा की निष्कपट कोशिश का जादू कह सकते हैं, जिसका प्रतिफल उम्मीद से ज्यादा है। देश की जनता ने चूहे-बिल्ली का खेल खेलने वाली नेताओं व उनकी पार्टियों को औकात बता दिया है। खासकर गरीबी व बुनियादी परिवर्तन की बस बात करने वाले वाम दलों को इस चुनाव में जनता ने पूरी तरह से खारिज कर यह बता दिया है कि उन्हें बहुत देर तक मूर्ख नहीं बनाया जा सकता। वहीं, लालू यादव, रामविलास पासवास, मुलायम सिंह यादव सरीखे अवसरवादियों को भी जनता ने झटक दिया है।

वामपंथी राज्यों केरल व पश्चिम बंगाल में वाम दलों का सफाया हो जाना, कोई साधारण बात नहीं। कहते हैं इन राज्यों की जनता बाकी राज्यों से अधिक जागरूक व शिक्षित हैं, तो वामदलों को अब यह समझ लेना चाहिए कि उनके सिद्धांत और व्यवहार के बीच के अंतर पर डला हुआ लाल रंग का पर्दा उठ चुका है। जनता जान चुकी है लाल झंडे वालों की कथनी और करणी में फर्क। देश की जनता को राजनीतिक स्थितरता चाहिए, जिससे ही विकास की उम्मीद की जा सकती है।

राजनीतिक स्थिरता की कसौटी पर कांग्रेस को छोड़ बाकी सभी दल बेकार साबित हो चुके हैं। सबसे बड़ी विपक्षी पार्टी बीजेपी को भी जनता मौका देकर देख चुकी है। वह भी एक से अधिक बार। और अब बीजेपी में तारणहार नेता अटल बिहारी वाजपेयी भी नहीं हैं। इसलिए उसे तो मुंह की खानी ही थी। पीएम इन वेटिंग लालकृष्ण आडवाणी को तो टिकट कटवानी ही नहीं चाहिए थी। क्योंकि 15वीं लोकसभा चुनाव की जनता एक्सप्रेस पर विकास पुरुषों को टिकट कनफर्म होना तय था। बाकी लौहपुरुषों के लिए इस ट्रेन में कोई जगह नहीं थी, लेकिन वह इतने अनुभवी व बूढ़े राजनीतिक होने के बावजूद नहीं समझ पाये।

खैर, इस चुनाव परिणाम के बाद हिन्दुस्तान की जनता को भोली-भाली समझने वाले नेता भी सावधान हो जाएं। वोट प्रतिशत केवल आबादी बढ़ने से नहीं बढ़ा है। जनता में जागरूकता भी बढ़ी और अब वह भी नेताओं के चाल, चरित्र व चतुराई को समझने लगी है। वोटरों में युवाओं की संख्या भी बढ़ी है, जिनमें भरोसा जगाया है राहुल गांधी सरीखे ईमानदार युवा नेताओं ने।

राहुल गांधी द्वारा भारतीय राजनीति में युवा ब्रिगेड बनाने की पहल सराहनीय है। देश को प्रगति की रफ्तार प्रदान करने के लिए इसकी बेहद जरूरत भी है। बेहतर तो यह होगा कि इस पहल से अन्य राष्ट्रीय दल भी सबक लें। लेकिन इसकी संभावना बेहद कम नजर आती हैए क्योंकि राजनीति में जड़ जमाकर बैठे बुजुर्ग नेताओं को दरकिनार करना इतना आसान नहीं है। इसके लिए देश के युवा मतदाताओं को ही कुछ करना होगा।

शायद देश के युवा मतदाता इसी दिशा में बढ़ रहे हैं कम से कम इस चुनाव परिणाम से तो ऐसा ही प्रतीत होता।

1 comment:

  1. This is good news that Congress is going to make its government without Left support.

    But This government will face biggest challenges from Terrorism,high Inflation and poverty.
    How Congress will tackle with all these issues that will decide the future of this government.

    This time India needs a strong foreign and domestic policy to tackle all these internal and external issues.

    Its will be a Golden opportunity for Congress to prove its capability to tackle all these issues without applying More taxes on its public.

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