भटक वे नहीं, मीडिया गया है

उदय केसरी
मेरे कुछ तथाकथित बुद्धिजीवी पत्रकार साथियों का टीम अन्ना के समर्थन को लेकर प्रायः मतभेद होता है। वे टीम अन्ना की हर छोटी-बड़ी गलतियों और उनपे लगने वाले आरोपों व उठने वाले सवालों को आधार बनाकर टीम अन्ना के प्रति मेरे सकारात्मक विचारों को खंडित करने की कोशिश करते हैं। मैं हर बार उनसे कहता हूं कि व्यक्ति या संगठन से कहीं बड़ा उसके विचार और मकसद होते हैं।

नीतीश की धर्मनिरपेक्षता व ममता की नाराजगी के मायने

उदय केसरी 
देश की राजनीति में देश कहीं पीछे छूटता जा रहा है। यह कोई नई बात नहीं है, लेकिन जनता को बार-बार इसे याद कराना भी जरूरी है, क्योंकि जनता से जुड़े मुद्दे अब सियासत के गलियारों में सत्ता और अहम के मुद्दों के आगे दम तोड़ने लगे हैं। देश के नाम पर और जनता के वास्ते अनेक राजनीतिक दल मौजूद हैं, लेकिन गौर करें तो लगभग पार्टियां पाइवेट लिमिटेड कंपनी जैसी या ऐसी कंपनियों के लिए हो चुकी हैं।

अच्छे दाम पर भद्दी चाय का प्लैटफार्म

उदय केसरी
भारत में ही नहीं, चाय दुनियाभर में लोकप्रिय पेय है। अपने देश  में चाय तो जैसे ज्यादातर लोगों की शक्ति, स्फूर्ति का राज हो। इसे पीए बिना जैसे कोई काम न हो। तभी सुदूर गांव से लेकर मैट्रो शहर तक कोने-कोने में भले ही आपको और कुछ मिले न मिले पर चाय की छोटी-बड़ी दुकान मिल ही जाएगी।

अब क्यों प्रतिक्रियावादी हो रहे हैं प्रधानमंत्री ?

उदय केसरी 
देश  बहुत मुश्किल  दौर से गुजर रहा है। सरकार और उसके नीति-नियंता अनिर्णय की स्थिति में हैं। महंगाई चरमसीमा की ओर बढ़ रही है। आम जनता कराह रही है। इन बातों से देश  का हर एक आम नागरिक निराश  और दुखी है, सिवाय कांग्रेस के शीर्ष नेताओं और यूपीए सरकार के।

गलतियों के बाद भी देशहित में टीम अन्ना की प्रासंगिकता जरूरी

उदय केसरी  
टीम अन्ना ने फिर हुंकार भरी है। टीम अन्ना ने यूपीए सरकार के 14 कैबिनेट मंत्रियों के अलावा भ्रष्टाचार के आरोप से अबतक अछूता रहे प्रधानमंत्री पर भी पहली बार भ्रष्टाचार के आरोप लगाए हैं। प्रधानमंत्री समेत 15 मंत्रियों के खिलाफ जो आरोप लगाए गए हैं, उनके आधार तथ्यों के नामवार पुलिंदें भी तैयार किए गए हैं।